तीव्र औद्यागिकीकरण की ओर अग्रसर हमारा हिमाचल प्रदेश



 हिमाचल प्रदेश पूरे विश्व में प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। खूबसूरत नज़ारों के साथ-साथ यहां का शांत एवं प्रदूषणरहित वातावरण, कानून व्यवस्था की बेहतर स्थिति इत्यादि कुछ ऐसे आकर्षण हैं, जो पर्यटन के साथ-साथ उद्यमियों को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित बना रही है कि राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को बिना किसी बाधा के विद्युत आपूर्ति होती रहे और उन्हें बेहतर अधोसंचरना उपलब्ध करवाई जाए। प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयास फलीभूत भी हो रहे हैं। यही कारण है कि सोलन, सिरमौर और ऊना जिले प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बनकर उभर रहे हैं।

 

 ऊना का टाहलीवाल स्थापित कर रहा नए आयाम

औद्यागिकीकरण की दिशा में तीव्र विकास की ओर अग्रसर ऐसा ही एक क्षेत्र है, जि़ला ऊना का टाहलीवाल। जिला ऊना के संतोषगढ़ विधानसभा क्षेत्र के टाहलीवाल में काफी कम समय में ही कई राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपने उद्योग स्थापित किए हैं। इनमें बिस्कुट बनाने वाली विश्व प्रसिद्ध कम्पनी कृमिका, स्पोर्टस शूज़ एवं चमड़े के जूतों का निर्माण करने वाली विख्यात कम्पनी ट्रेसर, जूते, चप्पल एवं टी-शर्ट इतयादि के लिए मश्हूर कम्पनी प्यूमा और उच्च गुणवत्ता के कागज़ का निर्माण करने वाली कम्पनी सेबर सहित कई अन्य कम्पनियां शामिल हैं।

कृमिका के टाहलीवाल स्थित प्लांट का वार्षिक उत्पादन 4298 करोड़ रुपये

बिस्कुट बनाने वाली प्रसिद्ध कम्पनी कृमिका के टाहलीवाल स्थित प्लांट का वार्षिक उत्पादन 4298 करोड़ रुपये है। यहां कार्यरत कुल कर्मचारियों में से 80 प्रतिशत से भी अधिक हिमाचली हैं। कर्मचारियों की सुविधा के लिए कृमिका कम्पनी ने आधुनिक कैंटीन का निर्माण किया है, जहां सस्ते दामों पर उनको भोजन उपलबध करवाया जाता है। कम्पनी ने अपने कामगारों के लिए श्रमिक आवासों का निर्माण भी किया है। पर्यावरण प्रदूषित हो इसका भी कम्पनियों ने विशेष ध्यान रखा है।

कर्मचारियों की सुविधा के लिए कम्पनी एक अस्पताल का निर्माण भी कर रही है



टाहलीवाल में ही स्थापित सेबर पेपर लिमिटिड द्वारा उच्च गुणवत्ता के कागज़ एवं कम्प्यूटर के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले कागज़ का निर्माण किया जाता है। इस कम्पनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कागज़ का निर्माणवेस्ट पेपरसे किया जाता है और कम्पनी इस कार्य के लिए उपयोग में लाए गए पानी कोरिसाईकलकरती है। कम्पनी तक कर्मचारियों के आवागमन के लिए सेबर कम्पनी ने बसों का विशेष प्रबंध किया गया है। कर्मचारियों की सुविधा के लिए कम्पनी एक अस्पताल का निर्माण भी कर रही है। यहां कुल 1600 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 77 प्रतिशत से अधिक हिमाचल के मूल निवासी हैं।

एक लाख से अधिक लोगों को रोज़गार उपलब्ध होगा

टाहलीवाल क्षेत्र के गांव गुरपलाह में कार्यरत सुखजीत एग्रो इंडस्ट्रीज में उच्च गुणवत्ता के कृषि उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यहां स्टार्च, तरल ग्लूकोज़, ड्राई ग्लूकोज़ इत्यादि का निर्माण किया जाता है। यहां बनने वाले उत्पाद टाफियां इत्यादि बनाने के साथ-साथ दवा उद्योग में भी काम में लाए जाते हैं। इन उत्पादों का प्रयोग खाद्य तेलों के निर्माण में भी किया जाता है। इस उद्योग में कार्यरत कुल 190 कर्मचारियों में से 153 हिमाचली मूल के हैं। कम्पनी ने अपने कर्मचारियों की सुविधा के लिए श्रमिक आवासों का निर्माण किया है और कामगारों के बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए बसों का प्रबंध किया हैं।

टाहलीवाल में कार्यरत अन्य राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भी यहां के निवासियों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है

वर्तमान राज्य सरकार के सत्त प्रयासों से गत दो साल औेर तीन माह की अवधि में प्रदेश में लगभग 11,418 करोड़ रुपये के निवेश की 2060 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है, इनमें एक लाख से अधिक लोगों को रोज़गार उपलब्ध होगा।उद्योगपतियों को एक ही स्थान पर सब सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार ने एकल खिड़की स्वीकृति एवं अनुश्रवण प्राधिकरण का गठन किया है ताकि उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध है। निःसंदेह, जिला ऊना में औद्योगिक विकास से विकास के नए अध्याय का सूत्रपात होगा।

 

 


Comments

  1. It is fine to know that more industry in Himachal pradesh.But the most important is sustainable growth.It should be mandatory for each industrialists to grow double number of trees and absolutely responsible for their growth and safety.

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