प्रदेश सरकार ने हिमाचल के नागरिकों की घर वापसी के लिए उठाए बड़े कदम


पूरा देश कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थितियों से जूझ रहा है और राज्य और राज्य के बाहर लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत लगे लाॅकडाउन के कारण देश के विभिन्न भागों में फंसे लोगों को राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करना सुनिश्चित कर रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश में अपने घर लौटने के इच्छुक व्यक्तियों की पहचान करने के लिए हेल्पलाइन सेवा की शुरूआत की है। देश के विभिन्न भागों में फंसे हुए हिमाचलियों को वापस लाने के लिए डाटा संकलित कर आवश्यक व्यवस्था शुरू की गई है। प्रदेश सरकार ने अन्य राज्यों में फंसे हिमाचल के लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए नोडल अधिकारियों को भी नियुक्त किया गया है।
राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने चलाई विशेष रेलगाड़ियां
कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों को निकालने का काम भी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के फंसे हुए लोगों को आवागमन की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेलगाड़ियां भी चलाई गईं। लोगों की सामूहिक रूप से प्रदेश वापसी के अलावा, देश के अन्य भागों में फंसे हुए व्यक्तियों को भी सहायता प्रदान की जा रही है। जिला कांगड़ा की पालमपुर उपमण्डल के गांव मलकेहड़ के 25 साल के दीपेन्द्र मिश्रा, जो चंडीगढ़ में प्रशिक्षण ले रहे थे, लाॅकडाउन के कारण वहां फंस गए थे। दीपेन्द्र ने राज्य के फंसे हुए लोगों की सहायता के लिए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्पलाइन नंबर पर काॅल किया। उन्हें 26 अप्रैल को अन्य विद्यार्थियों के साथ हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में हिमाचल भवन चंडीगढ़ से सोलन लाया गया और बाद में कांगड़ा भेज दिया गया।

हिमाचल वापस पहुंचने पर ली राहत की सांस
मुंबई में काम करने वाली किन्नौर जिला की मुस्कान ने कहा कि होटल बंद होने के कारण उनके पास प्रदेश वापस आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। उसने अपने गृह राज्य में पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की। शिमला जिले के सुन्नी के अमित कुमार, जो पुणे के एक होटल में काम करते थे, उन्होंने ऊना रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर कहा कि उन्हें लाॅकडाउन के कारण घर पर वापस पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन प्रदेश सरकार के प्रयासों ने इसे संभव बना दिया। गोवा से ऊना पहुंचे मनाली के राजन लामा ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इसी तरह, नगरोटा बगवां की नोमिता चौधरी, जो मोहाली में नर्सिंग संस्थान में काम कर रही थीं और साथ ही साथ कोचिंग भी ले रही थीं, लाॅकडाउन के बाद वापस अपने पैतृक स्थान पर पहुंच गईं। इन सभी लोगों को राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रदेश सरकार के गंभीर प्रयासों से वापस लाया गया है।

रेलगाड़ी से पहुंचाए प्रदेश के विभिन्न जिलों के नागरिक
पुणे से एक विशेष रेलगाड़ी 19 मई को 617 लोगों को लेकर ऊना पहुंची, जिसमें कांगड़ा के 215 हमीरपुर के 68, मंडी के 63, बिलासपुर के 16, कुल्लू के 37, सोलन के 41, सिरमौर के नौ, चंबा के 28, किन्नौर के दो, शिमला के 63 और ऊना के 70 लोग शामिल थे। इसी तरह मुंबई से एक और विशेष रेलगाड़ी 18 मई को 697 लोगों को लेकर ऊना पहुंची, जिसमें कांगड़ा के 242, हमीरपुर के 169, मंडी के 103, शिमला के 40, चंबा के 26, कुल्लू के 10, किन्नौर के 10, बिलासपुर के 43, ऊना के 38 और सिरमौर और सोलन जिलों के आठ-आठ लोग शामिल थे। गोवा के त्रिविम, मड़गांवो, करामली से एक विशेष रेलगाड़ी के माध्यम से 15 मई को लगभग 1486 लोग ऊना पहुंचे। इनमें जिला चंबा के 128 व्यक्ति, कांगड़ा के 322, मंडी के 415, बिलासपुर के 24, शिमला के 80, किन्नौर का एक, सोलन के 37, सिरमौर के 20, हमीरपुर के 53, कुल्लू के 397, लाहौल-स्पीति के दो और ऊना के सात लोग थे।
विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए भेजीं एचआरटीसी की बसें
नागपुर से पठानकोट तक 78 व्यक्तियों, मुंबई से ऊना तक 736 व्यक्तियों और पुणे से ऊना तक 546 व्यक्तियों को वापस लाने के लिए भी विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई। राज्य के 140 छात्रों को वापस लाने के लिए हिमाचल सड़क परिवहन निगम की नौ बसों को परवाणू से कोटा भेजा गया। चंडीगढ़ (ट्राइसिटी) में फंसे लोगों को सहायता भी दी गई, जिसके लिए बसों को बैचों में भेजा गया। ट्राई-सिटी क्षेत्र में फंसे 3500 से अधिक लोगों को चरणबद्ध तरीके से 144 बसों में वापस राज्य में लाया गया। 3 मई, 2020 को पहले बैच में ट्राई-सिटी क्षेत्र में फंसे 1314 व्यक्तियों को 51 बसों में वापस प्रदेश में लाया गया, जिसमें कांगड़ा जिले के 609 लोग, हमीरपुर जिले के 335 लोग, ऊना जिले के 132 लोग और चंबा जिले के 238 लोग शामिल थे।

दूसरे बैच में 49 बसों में वापस लाए हिमाचली
4 मई को 49 बसों में दूसरे बैच को प्रदेश में लाया गया, जिसमें मंडी जिला के 622 लोग, बिलासपुर जिले के 365 लोग, कुल्लू जिले के 191 और लाहौल-स्पीति जिले के 61 लोगों सहित 1239 लोगों को अन्य स्थानों से प्रदेश वापस लाया गया। इसी प्रकार तीसरा बैच 5 मई को राज्य के पांच जिलों के 1006 व्यक्तियों को 44 बसों में ट्राइसिटी से वापस लाया गया, जिसमें शिमला जिले के 585, सोलन जिले के 150, सिरमौर जिले के 170, किन्नौर जिले के 89 और बिलासपुर जिले के 12 लोग शामिल थे। यह देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हिमाचल के लोगों को राज्य में सुरक्षित वापस लाने का सबसे बड़ा अभियान था। इन सभी वापस लाए गए लोगों की इन्फ्लुएंजा लक्षणों की जांच की गई और इसके बाद उन्हें होम क्वारन्टीन में रखा गया। 

आरोग्य सेतु ऐप करवाई जा रही डाउनलोड
प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं और उन्हें ‘‘आरोग्य सेतु ऐप’’ डाउनलोड करने के लिए कहा गया है और साथ ही सामाजिक शिक्षा के महत्व के बारे में सूचना शिक्षा संचार (आईईसी) सामग्री प्रदान की जा रही है। इनके अलावा, हिमाचल प्रदेश के 29 निवासी, जिन्होंने विभिन्न उद्देश्यों के लिए लाॅकडाउन से पहले विभिन्न देशों की यात्रा की थी, उन्हें भी अन्य देशों से देश में वापस लाया गया है, जिनमें से 19 को दिल्ली में, पांच को केरल और पांच को पंजाब में रखा गया है। इसके बाद क्वारन्टीन अवधि पूरी होने पर उन्हें हिमाचल प्रदेश वापस लाया जाएगा।

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