हिमाचल सरकार ने बढ़ाई प्रदेश की हरियाली, रोपे लाखों पौधे

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण हिमाचल प्रदेश की सुंदरता को बढ़ाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ठोस कदम उठा रही है। सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आरंभ की गई योजनाओं से प्रदेश के हरित आवरण एवं वनों में वृद्धि होने के साथ लोगांे को आजीविका के अवसर भी मिल रहे हैं। प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि के लिए विशेष पौधरोपण अभियानों को चलाया जा रहा है। वर्ष 2018 में प्रदेश में 9785 हेक्टेयर वन भूमि पर 88,53,532 पौधे रोपे गए। वर्ष 2019 में पौधरोपण अभियान के अंतर्गत लगभग 7499 हेक्टेयर वन भूमि पर 65,34,217 पौधे रोपित किए गए।
इको पर्यटन को दिया जा रहा बढ़ावा
वन विभाग इको पर्यटन को प्रोत्साहन देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंडी जिला के जंजैहली क्षेत्र को 18.18 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह राशि ट्रेकिंग के रास्तों, वन विश्राम गृहों, जन सुविधाओं और वन चैकियों के सुधार पर खर्च की जाएगी। केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने मनाली व नाचन में प्राकृतिक उद्यानों और पैदल रास्तों के विकास के लिए तीन-तीन करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है। इसके अलावा प्रदेश में इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 25 स्थानों पर कैम्पिंग साईट शुरू की गई हैं।
आजीविका के उद्देश्य से चलाई जा रही योजना
हिमाचल के 6 जिलों के 18 वन मंडलों व 61 वन परिक्षेत्रों में जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जिका) द्वारा वित्तपोषित 800 करोड़ रुपये की हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थिकी प्रबंधन एवं आजीविका सुधार परियोजना कार्यान्वित की जा रही हैं। वन क्षेत्र को बढ़ाने और स्थानीय लोगों को वनों पर आधारित आजीविका के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत पिछले वर्ष 11.58 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस वर्ष इस परियोजना पर लगभग 29.71 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
वनों को आग से बचाने के लिए रैपिड फोरेस्ट फायर फोर्स गठित, 26 हजार नागरिकों को जोड़ा
प्रदेश में पहली बार वनों की आग के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न माध्यमों से लोगों को वनों को आग से बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। वनों की आग की रोकथाम और प्रतिरक्षण के लिए नया मैनुअल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय वन सर्वेक्षण की सैटेलाइट पर आधारित फायर एलर्ट एसएमएस सेवा से प्रदेश के नागरिकों को जोड़कर एक रैपिड फोरेस्ट फायर फोर्स का गठन किया गया है ताकि वनों में आग की सूचना का तुरंत पता चले और उचित कार्रवाई की जा सके। इससे अब तक 26 हजार से अधिक नागरिकों को जोड़ा जा चुका है।
स्कूली बच्चों को पढ़ाया जा रहा पर्यावरण संरक्षण का पाठ
स्कूली विद्यार्थियों में वन व पर्यावरण संरक्षण की भावना जागृत करने के उद्देश्य से वन मित्र योजना शुरू की गई हैै। इसके अंतर्गत विभिन्न जमा दो स्कूलों को एक निर्धारित वन क्षेत्र आवंटित किया जा रहा है जिसमें विद्यार्थियों के माध्यम से पौधे लगाने व उनकी देख-रेख का कार्य किया जाएगा। वर्ष, 2018-19 में इस योजना के अंतर्गत 228 स्कूल और 164.30 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया तथा 166830 पौधे रोपित किए गए। इस वित्त वर्ष के दौरान 146 स्कूलों और 131.5 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है और 130100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

‘‘एक बूटा बेटी के नाम’’
प्रदेश सरकार ने एक अन्य नई योजना एक बूटा बेटी के नाम की शुरूआत की है, जिसका उद्देश्य नवजात कन्या के नाम पर पौधे रोपित कर लोगों को वनों के महत्व और बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इसके अलावा चीड़ की पत्तियां आग का मुख्य कारण बनती हैं। इन पत्तियों को इकट्ठा करने और वन भूमि से हटाने के लिए एक नई नीति तैयार की गई है। इसके अतंर्गत चीड़ की पत्तियों पर आधारित उद्योग लगाने के लिए पूंजी निवेश पर 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम 25 लाख रुपये) देने का प्रावधान किया गया है। वन भूमि से लैन्टाना को हटाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष 4567 हेक्टेयर क्षेत्र से लैन्टाना हटाया गया, जबकि इस वर्ष 5000 हेक्टेयर क्षेत्र से लैन्टाना हटाने का लक्ष्य रखा गया है।
जड़ी-बूटी पर आधारित औषधि निर्माण के उद्योगों को दिया जा रहा बढ़ावा
वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों को सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए सामुदायिक वन संवर्धन योजना आरंभ की गई है। इसके अंतर्गत गांवों के पास खाली वन क्षेत्र पर न केवल पौधरोपण किया जाएगा बल्कि लोग भूमि एवं वन संवर्धन के कार्य भी करेंगे। प्रदेश सरकार ने एक अन्य योजना वन समृद्धि-जन समृद्धि भी आरम्भ की है, जिसका उद्देश्य जंगली जड़ी-बूटियों को बेचने व निजी जमीन से इनके उत्पादन को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस योजना के अंतर्गत जड़ी-बूटी संग्रह करने वाले स्थानीय निवासियों का समूह बनाकर दोहन के पश्चात् उनका रखरखाव, मूल्य संवर्द्धन और विपणन के लिए व्यवस्था की जा रही है। योजना में जड़ी-बूटी पर आधारित औषधि निर्माण के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही व्यक्तिगत निजी उद्यमी को भी जड़ी-बूटी व्यापार संबंधी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया है। वर्तमान में यह योजना सात जिलों में लागू की जा रही है, जहां स्थानीय लोगों के समूह बनाए गए हैं और 45.825 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। इस वर्ष इस योजना के लिए 200 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।


Comments

  1. सराहनीय कार्य हरियाली व पर्यावरण संरक्षण के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इसके लिए बधाई 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 जी ।🙏 🙏 🙏

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