प्रदेश सरकार ने किए ऐसे काम, आर्थिक तौर पर सशक्त हो रहा हिमाचल का प्रत्येक किसान

मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी किसानों के जीवन से भलीभांति परिचित हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री किसानों की आशाओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने में सफलता हासिल कर रहे हैं। विशेष है कि हिमाचल सरकार ने राज्य के किसानों के हित के लिए ऐतिहासिक योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का लाभा उठाकर प्रदेश का प्रत्येक किसान आर्थिक तौर पर सशक्त हो रहा है। राज्य सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि वर्ष 2022 तक हिमाचल के किसानों की आय को दोगुना किया जाएगा।
सरकार ने किसानों का किया सम्मान

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने किसानों को दी राहत
  • प्रदेश के 2 लाख से अधिक किसान परिवार हुए लाभान्वित
  • योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष दिए जा रहे 6000 रुपए
  • योजना के अंतर्गत प्रदेश के किसानों को वितरित की गई 5 लाख से अधिक राशि
  • प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना से प्राकृतिक खेती को मिली मजबूती
  • प्रदेश सरकार योजना के लिए किया है 20 करोड़ का बजट प्रावधान
  • राज्य के किसान अब अपना रहे प्राकृतिक खेती


  • मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना से हो रहा खेती एवं फसलों का संरक्षण
  • किसानों को सोलर फेंसिंग लगाने के लिए मिल रही सब्सिडी
  • खेतों पर कांटेदार तार लगाने के लिए मिल रहा 50 प्रतिशत उपदान
  • अब बंदर एवं बेसहारा पशु फसलों को नहीं पहुंचा पाएंगे नुक्सान
  • ‘‘जल से कृषि को बल’’ परियोजना ने बढ़ाया किसानों का हौसला
  • कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने व सिंचाई के लिए कारगर साबित हो रही योजना
  • हिमाचल सरकार ने योजना के लिए किया 50 करोड़ बजट का प्रावधान


  • योजना के तहत 534 पुरानी व नई सिंचाई योजनाओं का किया जा रहा पुनर्निमाण
  • ‘‘मुख्यमंत्री नूतन पॉली हाऊस परियोजना’’ से लाभान्वित हुए राज्य के 500 किसान
  • हिमाचल सरकार ने योजना के लिए किया 150 करोड़ का बजट प्रावधान
  • योजना के तहत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे 5000 पॉली हाऊस
  • योजना के अंतर्गत प्रदेश के 20,000 लाभार्थियों को मिलेगा रोजगार

मत्स्य पालन बना आजीविका का एक और साधन

  • प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य में विद्यमान सभी जल स्त्रोतों से 427.35 करोड़ रुपये की 20484.96 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया गया।
  • सरकारी ट्राऊट फार्मों से 97.15 लाख रुपये मूल्य की 17.87 मीट्रिक टन खाने योग्य ट्राऊट का उत्पादन किया गया है। इन फार्मों से कुल 4814.13 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। निजी क्षेत्रों में भी 25.20 करोड़ रुपये मूल्यों की 1037.25 मीट्रिक टन ट्राऊट मछली का उत्पादन किया गया है।
  • प्रदेश में रेनबो ट्राऊट के सफलतापूर्वक प्रजनन के परिणामस्वरूप कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा, किन्नौर, चम्बा व सिरमौर जिलों में भी निजी क्षेत्रों में ट्राऊट इकाइयों की स्थापना की गई है।
  • राज्य के प्रमुख जलाशयों में 10339 माहीगीरों को पूर्णकालीन स्वरोजगार उपलब्ध करवाया गया तथा इन माहीगीरों द्वारा 13.66 करोड़ रुपये मूल्य की 1059.90 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया गया है। 
  • इस दौरान 2691 सक्रिय जलाश्य माहीगीरों को आखेट बंद मत्स्य सीजन के दौरान 80.73 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।


  • केंद्रीय प्रायोजित स्कीम-मछुआरों के कल्याण हेतु राष्ट्रीय योजना के घटक मछुआरा आवास योजना का कार्यान्वयन केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा 90ः10 अनुपात में वहन किया जाता है। मछुआरा आवास योजना के तहत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातीय के 200 मछुआरे लाभान्वित हुए। 
  • मत्स्य पालन को राज्य में बढ़ावा देने तथा स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 468 नए रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एन.एपफ.डी.बी.) से प्राप्त अनुदान सहायता 2.50 लाख रुपये की राशि से 100 मछुआरे लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त 10 विभागीय अध्किारियों को प्रशिक्षण के लिए देश के विभिन्न राज्यों में ट्रेनिंग आॅफ ट्रेनर्ज (टी.ओ.टी.) प्रोग्राम के तहत भेजा गया।
  • केंद्रीय प्रायोजित योजना नील क्रांति के अंतर्गत राज्य में मत्स्य तालाबों, रिटेल आऊटलेट, ट्राऊट रेसवेज, फीड मिलें आदि भी स्थापित की गई। 
  • राज्य में एक्वाक्लचर को बढ़ावा देने व उत्पादकता को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकारी कार्प फार्म नालागढ़ में रीसर्कुलेटिंग एक्वाक्लचर सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। 
  • गोबिन्दसागर जलाशय में वर्ष 2018-19 में पहली बार केजों में ट्राऊट मछली का प्रयोगात्मक तौर पर सफल उत्पादन किया। 
  • वर्ष 2019-20 में कौलडैम जलाशय में पिंजरों में ट्राऊट मछली का उत्पादन आरंभ किया जाएगा। 
  • सरकार द्वारा प्रदेश में भाखड़ा (बिलासपुर), खटियाड़ (कांगड़ा), रतयोड़ (सोलन) तथा कटोहड़ कलां (ऊना) में खाद्य प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की गई है। 
  • सरकार द्वारा 1.09 करोड़ रुपये की लागत से ट्राऊट पफार्म पतलीकुहल में एक ट्राऊट प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की जा रही है। 
  • प्रदेश सरकार द्वारा भेजा गया ट्राऊट बीमा का प्रस्ताव केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर लिया गया है। भविष्य में ट्राऊट उत्पादक अपने मत्स्य ध्न का प्राकृतिक आपदाओं व अन्य प्रकार की क्षतियों से सुरक्षित करने के लिए बीमा करवा सकते हैं।
  • सरकार द्वारा निजी क्षेत्रों में 7 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया गया है। यह इकाई बद्दी जिला सोलन में स्थापित की जाएगी।

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