कैंसर का इलाज करने वाले विश्व विख्यात पद्मश्री डॉ. यशी ढोंडेन के देहांत पर मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने जताया शोक ।





तिब्बतियन पद्धति से कैंसर का इलाज करने वाले विश्व विख्यात पद्मश्री डॉ. यशी ढोंडेन जी का देहांत का ना सिर्फ हिमाचल बल्कि पुरे देश विदेश के कैसंर रोगियों के लिए बहुत बड़ी क्षति है । मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने भी डॉ यशी जी के देहांत पर गहरा शोक व्यक्त किया है.डॉ यशी जी हिमाचल के धर्मशाला ( मैक्लोडगंज) में पिछले कई दशकों से जनता की सेवा कर रहे थे। इनका समाज के लिए योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

तिब्बतियन पद्धति से कैंसर का इलाज करने वाले पद्मश्री डॉ. येशी ढोंडेन जी का देहांत मैक्लोडगंज स्थित उनके आवास अशोका होटल में हुआ । तिब्बतियन डॉक्टर ढोंडेन जी बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के निजी चिकित्सक भी रह चुके है। उनके देहांत से पूरा तिब्बती समुदाय ही नहीं बल्कि जिन कैंसर के मरीजों को उन्होंने नई जिंदगी दी, वो भी इनके देहांत से काफी दुखी हैं ।


डॉ. ढोंडेन जी के पारिवारिक सदस्य लोबसांग त्सेरिंग ने बताया कि शुक्रवार सुबह उनका संस्कार मैक्लोडगंज में किया जाएगा। दो दिन तक उनकी देह की तिब्बतियन पद्धति के अनुसार पूजा होगी। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें की डॉ. येशी कैंसर के अलावा ट्यूमर, एड्स, सुराइसिस, हेपेटाइटिस ल्यूकेमिया आदि गंभीर रोगों का भी इलाज करते थे।


तिब्बती चिकित्सा पद्धति में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें 20 मार्च, 2018 को पद्मश्री अवार्ड से राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था। डॉ. यशी जी का तिब्बत के लोका क्षेत्र में 15 मई, 1927 को जन्म हुआ था। उनका परिवार तिब्बत की चिकित्सा पद्धति के लिए प्रसिद्ध रहा है।आपको हम यहां बता दें 20 साल की उम्र में ही डॉ यशी जी दलाईलामा का निजी चिकित्सक बन गए थे ।1959 में वह दलाईलामा के साथ भारत आए थे । डॉ. यशी ने 23 मार्च, 1961 को तिब्बत से भारत में शरणार्थी के रूप में आकर धर्मशाला में तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव रखी। उन्होंने धर्मशाला में तिब्बतियन मेडिकल एंड एस्ट्रो इंस्टीट्यूट की स्थापना कर तिब्बतियन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाया।

                                          

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